Ek ladki ko dekha by Javed Akhtar

Saw a girl then it felt like this
Saw a girl then it felt, as if

a blooming rose, as if
a poet’s dream, as if
a bright ray of light, as if
a deer in the woods, as if
a moonlit night, as if
a softly whispered sentence, as if
a lamp burning in the temple, O!
Saw a girl then it felt like this!

Saw a girl then it felt like this
Saw a girl then it felt, as if
a form of dawn, as if
sunlight in winter, as if
a twang of the veena*, as if
the life in colors, as if
the swaying vines, as if
the play of waves, as if
the cool breeze carries fragrance, O!
Saw a girl then it felt like this

Saw a girl then it felt like this
Saw a girl then it felt, as if
a dancing peacock, as if
a silken thread, as if
a symphony of fairies, as if
a fire built of sandalwood, as if
the sixteen ornaments of beauty, as if
a fountain of nectar, as if
slowly rising intoxication, O!
Saw a girl then it felt like this
Saw a girl then it felt like this!

*a veena is a stringed musical instrument.

Note: I did this English translation.

हो ओ … एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा, जैसे
खिलता गुलाब, जैसे
शायर का ख्वाब, जैसे
उजली किरन, जैसे
बन में हिरन, जैसे
चाँदनी रात, जैसे
नरमी बात, जैसे
मन्दिर में हो एक जलता दिया, हो!
ओ… एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा!

हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा, जैसे
सुबह का रूप, जैसे
सरदी की धूप, जैसे
वीणा की तान, जैसे
रंगों की जान, जैसे
बलखायें बेल, जैसे
लहरों का खेल, जैसे
खुशबू लिये आये ठंडी हवा, हो!
ओ… एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा!

हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा, जैसे
नाचता मोर, जैसे
रेशम की डोर, जैसे
परियों का राग, जैसे
सन्दल की आग, जैसे
सोलह श्रृंगार, जैसे
रस की फुहार, जैसे
आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता नशा, हो!
ओ… एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा!
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा!